टूटी है मेरी नींद, मगर तुमको इससे क्या, बजते रहे हवाओसे दर, तुमको इससे क्या. तुम मौज मौज मिस्ले-सबा घूमते रहो, कट जाये मेरी सोच के पर, तुमको इससे क्या. औरो का हाथ थामो, उन्हें रास्ता दिखाओ, मैं भूल जा… more →
જયદીપનું જગતJaydeep wrote 2 years ago: टूटी है मेरी नींद, मगर तुमको इससे क्या, बजते रहे हवाओसे दर, तुमको इससे क्या. तुम मौज मौज मिस्ले-सबा … more →
Jaydeep wrote 2 years ago: ઉર્દૂના પ્રખ્યાત કવિયત્રી પરવીન શાકિરનો જન્મ 24 નવેમ્બર, 1952ના રોજ કરાચી ખાતે થયો હતો. તેઓ ઉચ્ચ શિક … more →