सागर-ए-सुबह चूकां लाओ, के कुछ रात कटे, नूर-ए-सय्याल को छलकाओ, के कुछ रात कटे । नग़मा-ए-जल्वा-ए-रुख गाओ, के कुछ रात कटे, शोला-ए-इश्क़ को भडकाओ, के कुछ रात कटे । भूले बिसरे हुए ग़म हाए हयात-ए-रफ़्ता, तुम भी… more →
જયદીપનું જગતJaydeep wrote 1 year ago: सागर-ए-सुबह चूकां लाओ, के कुछ रात कटे, नूर-ए-सय्याल को छलकाओ, के कुछ रात कटे । नग़मा-ए-जल्वा-ए-रुख गा … more →