मुझे दे दे रसीले होंट, मासूमाना पेशानी, हसीन आंखे के मैं एक बार फिर रंगीनीओमें खो जाउं मेरी हस्ती को तेरी इक नज़र आग़ोशमें ले ले हमेशा के लिए इस दाममें महफ़ूज़ हो जाउं ज़िया-ए-हुश्न से ज़ुल्मत-ए-दुनियामें न… more →
જયદીપનું જગતJaydeep wrote 2 years ago: मुझे दे दे रसीले होंट, मासूमाना पेशानी, हसीन आंखे के मैं एक बार फिर रंगीनीओमें खो जाउं मेरी हस्ती को … more →
Jaydeep wrote 2 years ago: ફૈઝ અહમદ ફૈઝની એક સુંદર રચનાથી શુભારંભ કરીએ, ‘बज़्मे उर्दू’ નો: दोनो जहां तेरी मोहब्बतमें हार के, वो … more →