तेरे क़रीब आके बडी उलझनों में हूं मैं दुश्मनों में हूं कि तेरे दोस्तों में हूं । मुझसे गुरेज़-पा है तो हर रास्ता बदल मैं संगे-राह हूं तो सभी रास्तों में हूं । तू आ चुका है सतह पे कब से ख़बर नहीं बेदर्… more →
જયદીપનું જગતJaydeep wrote 1 year ago: तेरे क़रीब आके बडी उलझनों में हूं मैं दुश्मनों में हूं कि तेरे दोस्तों में हूं । मुझसे गुरेज़-पा है … more →
Jaydeep wrote 1 year ago: મિત્રો, રાજકોટ આવીને ફરી પાછાં આપની સાથે કદમ મેળવતાં થોડો વિલંબ જરૂર થયો છે, પરંતુ હવે નિયમિતતા આવશે … more →
Jaydeep wrote 2 years ago: यही वादी है वो हमदम जहाँ रेहाना रहती थी, वो इस वादी कि शहज़ादी थी और शाहाना रहती थी, कँवल का फूल थी, … more →
Jaydeep wrote 2 years ago: अश्क आंखों में कब नहीं आता लहू आता है जब नहीं आता होश जाता नहीं रहा लेकिन जब वो आ … more →