आप कहते हो कि जहाँ छूटा, हमको तो जिस्मका पता छूटा ! अब हमें ये भी ना रहा मालूम, राहमें कौन फिर कहाँ छूटा ? अब उसे कैसे, कौन समजाये ? बूत पकड़ा तो फिर खुदा छूटा ! काम होता है उनकी मर्जीसे, चाह छूटी, भला… more →
ગુર્જર કાવ્ય ધારા.........a way of talkingpravinshah wrote 5 months ago: आप कहते हो कि जहाँ छूटा, हमको तो जिस्मका पता छूटा ! अब हमें ये भी ना रहा मालूम, राहमें कौन फिर कहाँ … more →
pravinshah wrote 5 months ago: एक खुला आसमान चाहिए, चिडियों को उडान चाहिए ! एक ही दुनियासे कुछ नहीं होगा, हरेक को एक जहान चाहिए ! स … more →
pravinshah wrote 11 months ago: बीती जो रात वो कहाँ ढूंढे ? खो गई बात वो कहाँ ढूंढे ? होगी बारिश अब अकेले में, थी जो बरसात वो कहाँ … more →
pravinshah wrote 1 year ago: कभी दिन दहाडे, कभी रात में आया, वो मेरा सनम, बात की बात में आया । कई बार पहले भी मिल चूके हैं उनसे … more →